SPECIAL REPORT Kolkata
प्रकाशित तिथि: 2026-10-30 14:42:21 Koshi Voice News Desk
कोलकाता पोर्ट में डिजिटल क्लीयरेंस और आधुनिक स्कैनर सिस्टम लॉन्च: कार्गो आवाजाही होगी तेज, शिपिंग सुगमीकरण को मिलेगी नई उड़ान

पोर्ट लॉजिस्टिक्स और शिपिंग सुगमीकरण के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी (KPA) ने बंदरगाह पर कार्गो की आवाजाही को तेज करने के लिए डिजिटल क्लीयरेंस और आधुनिक स्कैनर प्रणालियों का नया सॉफ्टवेयर लॉन्च किया है। यह पहल प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान और मैरीटाइम इंडिया विजन 2030 के तहत बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यह सॉफ्टवेयर कार्गो क्लीयरेंस प्रक्रिया को पारंपरिक मैनुअल तरीकों से मुक्त कर पूर्णतः डिजिटल और पारदर्शी बनाएगा, जिससे आयात-निर्यातकों को रीयल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित मंजूरी की सुविधा मिलेगी।

Doctor Website Service

नई प्रणाली में आधुनिक स्कैनरों का एकीकरण किया गया है, जो कंटेनरों की उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग कर सकते हैं और संदिग्ध कार्गो की पहचान कुछ ही मिनटों में कर सकते हैं। इससे न केवल सुरक्षा में वृद्धि होगी, बल्कि भौतिक निरीक्षण के लिए लगने वाला समय भी काफी कम होगा। कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष ने बताया कि यह सॉफ्टवेयर कस्टम्स, शिपिंग लाइन्स, कंटेनर फ्रेट स्टेशन (CFS) और टर्मिनल ऑपरेटरों के बीच डेटा को एकीकृत करेगा, जिससे 'सिंगल विंडो' क्लीयरेंस को बल मिलेगा और कागजी कार्रवाई में कमी आएगी।

व्यापार जगत ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे पूर्वी भारत के आयात-निर्यात कारोबार को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले कार्गो क्लीयरेंस में 3-4 दिन का समय लगता था, जो अब डिजिटल क्लीयरेंस और स्कैनर सिस्टम के कारण 24-48 घंटों में सिमटने की उम्मीद है। इससे बंदरगाह पर लगने वाली भीड़ कम होगी और शिपिंग कंपनियों की टर्नअराउंड टाइम में भी सुधार होगा। कोलकाता पोर्ट से होकर नेपाल, भूटान और पूर्वोत्तर भारत के लिए होने वाले व्यापार पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।

यह सॉफ्टवेयर पोर्ट के सभी प्रमुख टर्मिनलों—हल्दिया, कोलकाता डॉक्स और बजबज—पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कंटेनर टर्मिनलों को कवर किया जाएगा, जबकि बल्क और ब्रेक-बल्क कार्गो के लिए अगले छह महीनों में विस्तार की योजना है। अधिकारियों ने बताया कि सॉफ्टवेयर में एआई-आधारित रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम भी शामिल है, जो उच्च जोखिम वाले कंटेनरों को स्वतः चिह्नित कर सकता है और निम्न जोखिम वाले कार्गो को बिना रोक-टोक आगे बढ़ा सकता है। इससे मानवीय त्रुटियों में कमी आएगी और राजस्व वसूली में भी पारदर्शिता बढ़ेगी।

कोलकाता पोर्ट अथॉरिटी ने इस परियोजना के लिए एक विशेष डिजिटल टास्क फोर्स का गठन किया है, जो सॉफ्टवेयर के रोलआउट की निगरानी करेगा और हितधारकों को प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह कदम न केवल बंदरगाह की परिचालन क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक शिपिंग हब बनाने की दिशा में एक मजबूत कड़ी साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की डिजिटल पहलें देश के अन्य प्रमुख बंदरगाहों के लिए भी मॉडल का काम करेंगी और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।

Election Campaign Service
Disclaimer: Koshi Voice News पर प्रकाशित समाचार, लेख, फोटो, वीडियो एवं अन्य सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है। समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, बिहार सरकार, बिहार पुलिस, सरकारी विभागों, प्रेस विज्ञप्तियों तथा अन्य मान्यता प्राप्त स्रोतों के आधार पर प्रकाशित किए जाते हैं। कुछ तस्वीरें AI-Generated या सांकेतिक हो सकती हैं। जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि करना उचित होगा। Grievance Officer: शिकायत, सुझाव या आपत्ति के लिए ईमेल: ceo@koshivoice.in
#KoshiVoice #KolkataNews #BiharNews #LatestNews #KoshiUpdates
अपनों के साथ साझा करें:
Koshi Voice Logo
Published by Koshi Voice News Desk
राष्ट्र प्रथम, जन-जन की आवाज़! कोशी वॉइस (Koshi Voice) बिहार और देश-दुनिया की हर ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीतिक हलचल और जमीनी हकीकत को बिना डरे, बिना झुके आप तक पहुँचाने वाला सबसे विश्वसनीय न्यूज़ पोर्टल है। निष्पक्ष पत्रकारिता ही हमारा संकल्प है।