कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के वार्डों की संख्या 144 से बढ़ाकर 209 करने की प्रस्तावित योजना पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। यह याचिका केएमसी के पूर्व पार्षद और विपक्षी दलों के नेताओं सहित कई नागरिकों द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने परिसीमन प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के पालन पर सवाल उठाए थे।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में दलील दी कि वार्डों की संख्या में इस तरह की भारी बढ़ोतरी से जनसंख्या के अनुपात में असंतुलन पैदा होगा और कई क्षेत्रों का उचित प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन का प्रस्ताव बिना व्यापक जनगणना और सार्वजनिक परामर्श के तैयार किया गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने केएमसी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है और नए वार्डों के गठन से पहले सभी हितधारकों की सहमति आवश्यक है।
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने अदालत को बताया कि परिसीमन का प्रस्ताव जनसंख्या वृद्धि और शहरी विस्तार को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं है। सरकार ने अदालत से याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति संजीव बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चूंकि मामला जनहित से जुड़ा है, इसलिए सभी पक्षों को सुना जाना आवश्यक है। अदालत ने राज्य सरकार से परिसीमन के संबंध में सभी संबंधित दस्तावेज और अधिसूचनाएं प्रस्तुत करने को कहा है। साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से पहले सभी तथ्यों की गहन जांच करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला आगामी नगर निगम चुनावों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वार्डों की संख्या बढ़ने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। विपक्षी दलों ने सरकार पर अपने पक्ष में परिसीमन करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार इसे प्रशासनिक आवश्यकता बताती है। अदालत ने सभी पक्षों को शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी है। मामले की अगली सुनवाई 25 अक्टूबर को होगी, जिसमें संभवतः अंतरिम आदेश पर फैसला सुनाया जा सकता है।